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कटनी। जिले में पेयजल संकट के चलते लागू प्रतिबंधात्मक आदेश के बीच रीठी तहसील में बोरिंग मशीन जप्त किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बोरिंग मशीन संचालक ब्रम्हदत्त पटेल ने प्रशासनिक कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए अपने पक्ष में वैध अनुमति दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं तथा मशीनों को अवैध रूप से जप्त किए जाने का आरोप लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कटनी द्वारा जिले को 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए बिना अनुमति नए निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी दौरान 19 मई 2026 की रात्रि तहसील रीठी के ग्राम पटौहा स्थित खसरा क्रमांक 615 पर प्रशासनिक दल ने कार्रवाई करते हुए बोरिंग मशीन क्रमांक MP19HA4519 एवं कम्प्रेसर वाहन क्रमांक MP31GA0165 को जप्त कर लिया था।
प्रशासन का कहना था कि मौके पर बोरिंग कार्य से संबंधित कोई वैध अनुमति दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। वहीं बोरिंग मशीन संचालक ब्रम्हदत्त पटेल ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए दावा किया है कि उनकी मशीन ग्राम पटौहा निवासी राजेन्द्र प्रसाद राय की भूमि खसरा क्रमांक 160 पर वैध अनुमति क्रमांक 6127/अविअ/नलकूप खनन अनुमति/2026 दिनांक 07 मई 2026 के तहत बोरिंग कार्य करने गई थी।


ब्रम्हदत्त पटेल के अनुसार 19 मई को वैध अनुमति के आधार पर बोरिंग कार्य पूर्ण करने के बाद उनके वाहन चालक वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में भोजन करने के उद्देश्य से मशीन एवं कम्प्रेसर वाहन कुछ समय के लिए खड़े किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी समय प्रशासनिक अमले ने वाहन जप्त कर लिए, जबकि मशीन संचालकों द्वारा मौके पर पीडीएफ फाइल के माध्यम से वैध अनुमति भी दिखाई गई थी। इसके बावजूद अनुमति को कथित रूप से फर्जी बताते हुए मशीनों को अवैध रूप से जप्त कर लिया गया।


वाहन मालिक ने बताया कि जप्ती के बाद से मशीनें थाना रीठी में खड़ी हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके अनुसार मशीन में कार्यरत लगभग 15 कर्मचारियों का वेतन, भोजन एवं अन्य खर्च मिलाकर प्रतिदिन लगभग 22 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं मशीनों की मासिक किश्त लगभग 1 लाख 83 हजार रुपये है। इसके अतिरिक्त अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय से पूर्व में ली गई, किसानों द्वारा ली गई अनुमति जिनकी बुकिंग हमारे पास है और ऐसे ही सभी ब्लॉक क्षेत्र से लगभग 45 से 50 एडवांस बुकिंग ली गई है जिसमें यह इस एडवांस बुकिंग कार्य पर भी प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें पूरा करने में वाहन मालिक असमर्थ हो रहा है। इससे प्रतिदिन लाखों रुपये के संभावित कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार आर्थिक दबाव के कारण उनके स्वास्थ्य एवं मानसिक स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। परिवार का पालन-पोषण करना भी कठिन होता जा रहा है। ब्रम्हदत्त पटेल ने प्रशासन से मशीन एवं कम्प्रेसर वाहन को शीघ्र रिहा किए जाने की मांग की है।
मामले में उचित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर वाहन मालिक द्वारा उच्च न्यायालय की शरण लेने की तैयारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार भरण-पोषण एवं आर्थिक नुकसान को लेकर नोटिस जारी किया गया है तथा शीघ्र न्याय नहीं मिलने की स्थिति में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
