सुप्रीम कोर्ट में महेंद्र गोयनका प्रकरण: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला ने सुनवाई से किया खुद को अलग, मामला अब नई पीठ के समक्ष जाएगानई दिल्ली। महेंद्र गोयनका से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति Justice J. B. Pardiwala ने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (recuse) कर लिया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए कथित तौर पर टिप्पणी की—“इस केस में कौन हैं महेंद्र गोयनका?”—और इसके बाद उन्होंने इस प्रकरण की सुनवाई करने से इंकार कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय की किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है। महेंद्र गोयनका, जो रायपुर निवासी बताए जाते हैं, पूर्व में मध्य प्रदेश के प्रभावशाली विधायक Sanjay Pathak के परिवार से जुड़ी कंपनी में कार्यरत रहे हैं। साथ ही वह यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में भी एक प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्य कर चुके हैं।
गोयनका पर जालसाजी, धोखाधड़ी और सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि कंपनी के बिके हुए माल को छलपूर्वक बेचने, वित्तीय हेरफेर करने तथा व्यावसायिक संपत्तियों के दुरुपयोग जैसे मामलों में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है।मामले से जुड़े आरोपों के अनुसार, महेंद्र गोयनका ने कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के माध्यम से संजय पाठक परिवार से संबद्ध कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया।
इस संबंध में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कटनी (मध्य प्रदेश) में भी गोयनका एवं उनके सहयोगियों/डायरेक्टर्स के विरुद्ध धारा 420, 120बी, 467, 468 और 471 के तहत दो अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, गोयनका से जुड़े सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं पहले ही सर्वोच्च न्यायालय से निरस्त हो चुकी हैं, इसके बावजूद संबंधित आरोपी पिछले लगभग डेढ़ से दो वर्ष से फरार बताए जा रहे हैं। गंभीर आरोपों और दर्ज प्रकरणों के बावजूद मध्य प्रदेश पुलिस अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है, जिससे जांच और कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि महेंद्र गोयनका को मध्य प्रदेश के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त रहा है। साथ ही सत्ता से जुड़े कुछ बिचौलियों द्वारा उन्हें अप्रत्यक्ष समर्थन दिए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel से भी उनकी नजदीकियां रही हैं।
हालांकि इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक स्तर पर अभी शेष है।राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के बीच यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस से जुड़े कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से महेंद्र गोयनका के हित में जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कराई जा रही हैं तथा विभिन्न शासकीय विभागों में शिकायतों का सिलसिला चलाकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। आरोपों में कटनी के कुछ स्थानीय राजनीतिक नाम भी सामने आए हैं, जिनके माध्यम से प्रशासनिक दबाव बनाए जाने की बातें कही जा रही हैं।
प्रकरण को और गंभीर बनाते हुए मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 9 मई 2025 के एक आदेश का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका के विरुद्ध कथित वित्तीय गबन संबंधी प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज होने की बात कही जा रही है। इसके अतिरिक्त, गोयनका से जुड़ी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर के आरोप सामने आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति पारदीवाला द्वारा सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेने के बाद अब यह मामला नई पीठ के समक्ष जाएगा। ऐसे में महेंद्र गोयनका से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, वित्तीय गड़बड़ियों और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर न्यायिक जांच और अधिक गहराने की संभावना है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने महेंद्र गोयनका की कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं और यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक संवेदनशील होता दिखाई दे रहा है।
