
धान के रख-रखाव में लापरवाही का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; मौके पर सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान की मांग
कटनी। मझगवां ओपन कैप में भंडारित धान के रख-रखाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। भंडारित धान के अंकुरित होने का कथित वीडियो सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता इंद्र मिश्रा ने सोमवार को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर मौके पर जांच कराएगा या फिर यह आवेदन भी अन्य शिकायतों की तरह सरकारी फाइलों के किसी कोने में दबकर रह जाएगा?
ज्ञापन में कहा गया है कि मझगवां ओपन कैप में बड़ी मात्रा में धान का भंडारण किया गया है। वायरल वीडियो में धान अंकुरित अवस्था में दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि वीडियो और धान की वास्तविक स्थिति की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल मौके पर पहुंचकर वीडियो में दिखाई जा रही स्थिति का सत्यापन कराए।
सरकारी संपत्ति और किसानों की उपज पर उठे सवाल
ज्ञापन में मझगवां ओपन कैप से जुड़े पूर्व के कथित धान चोरी और अनियमितताओं के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस ज्ञापन से नहीं होती है, इसलिए इनका वास्तविक तथ्य जांच का विषय रहेगा।
मात्रा, गुणवत्ता और रिकॉर्ड के मिलान की मांग
ज्ञापन में भंडारित धान की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और संबंधित रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि धान के रख-रखाव में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाह प्रशासनिक कदम पर
मामले में शिकायत तो जिला प्रशासन तक पहुंच गई है, लेकिन अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। क्या मौके पर जांच दल भेजकर धान की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाएगा? क्या स्टॉक रजिस्टर और भौतिक भंडारण का मिलान होगा? क्या वायरल वीडियो की वास्तविकता की जांच की जाएगी? और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
शिकायतकर्ता ने ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि आगामी 2 से 4 दिनों में मामले में ठोस जांच और कार्रवाई शुरू नहीं होती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। मझगवां ओपन कैप में धान की वास्तविक स्थिति जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—शिकायत पर प्रशासनिक जांच की मुहर लगेगी या यह आवेदन भी शिकायतों के ढेर में दबकर रह जाएगा?
