मूलभूत सुविधाओं के अभाव में हजारों ग्रामीण परेशान, जांच की मांग तेज

बरही। भारत सरकार के उपक्रम कुटेश्वर लाइमस्टोन माइंस से प्रभावित एवं आश्रित गांवों में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद में प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर विकास कार्य दिखाई नहीं देते। परिणामस्वरूप कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
जानकारी के अनुसार, कुटेश्वर लाइमस्टोन माइंस प्रबंधन द्वारा लगभग एक दशक पूर्व कई प्रभावित गांवों को गोद लेकर उनके विकास का संकल्प लिया गया था। इसके तहत ग्राम पंचायत तिमुआ, कोनिया, घंघरौटा, मनघटा, जारारोडा, गैरतलाई दफाई सहित अन्य आश्रित बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, विद्युत, खेल मैदान और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाना था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी इन गांवों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निवास करते हैं, जिन्हें आज भी बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और पक्की सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई गांवों में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोगों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सीएसआर राशि के खर्च पर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा सीएसआर मद में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में विकास कार्य नगण्य हैं। उनका कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च हो रही है तो उसका प्रभाव प्रभावित गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं और वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सीएसआर मद में खर्च की गई राशि का सामाजिक एवं वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से हस्तक्षेप कर प्रभावित गांवों में आवश्यक विकास कार्य सुनिश्चित कराने की अपील की है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और कंपनी प्रबंधन की उदासीनता के कारण विकास योजनाओं का लाभ गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद समाधान की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
इस संबंध में एसडीएम विजयराघवगढ़ विवेक गुप्ता ने कहा कि कंपनी प्रबंधन के साथ बैठक कर सीएसआर मद की जानकारी ली जाएगी तथा प्रभावित गांवों में आवश्यक विकास कार्य कराए जाने के संबंध में उचित पहल की जाएगी।
