
कटनी। बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने और डिजिटल सुरक्षा अपनाने की आवश्यकता है। साइबर ठग लगातार केवाईसी अपडेट, फर्जी नौकरी, ऑनलाइन शॉपिंग, निवेश, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, सोशल मीडिया, क्यूआर कोड, डीपफेक, रिमोट एक्सेस, सिम स्वैपिंग और अन्य तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
जारी साइबर सुरक्षा गाइड में नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम पिन या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। केवाईसी अपडेट, बैंकिंग सेवाओं या सरकारी एजेंसियों के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज और ईमेल की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
ऑनलाइन खरीदारी, नौकरी और निवेश से जुड़े मामलों में केवल विश्वसनीय वेबसाइटों और अधिकृत संस्थाओं का ही उपयोग करें। अत्यधिक मुनाफे, आसान नौकरी या आकर्षक ऑफर के लालच में आकर अग्रिम भुगतान करने से बचें।
गाइड में यह भी बताया गया है कि भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगता है, तो उसकी शिकायत तुरंत करें।
साइबर सुरक्षा के लिए मोबाइल और कंप्यूटर को अपडेट रखें, केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें तथा सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग लेनदेन से बचें।
यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों या संदेह हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
