35 वर्ष पुराने पट्टे की जमीन का मामला, कलेक्टर से तहसीलदार तक पहुंची शिकायतें; करीब 70 एकड़ भूमि पर कब्जे का आरोप
कटनी। विजयराघवगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम जंगल पुरैनी, पटवारी हल्का नंबर-1 में सरकारी एवं आदिवासी पट्टाधारकों की भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद विवादित भूमि से कथित कब्जा हटाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
35 साल पहले मिला पट्टा, आज भी जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायतकर्ता दोमारी एवं स्वदेशी लाल का आरोप है कि करीब 35 वर्ष पूर्व उन्हें ग्राम जंगल पुरैनी में पट्टे की भूमि आवंटित की गई थी। उनका कहना है कि उक्त पट्टे की जमीन लाखन सिंह के पास गिरवी रखी गई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इसके बाद से संबंधित भूमि पर लाखन सिंह का कथित कब्जा बना हुआ है और उन्हें अपनी पट्टे की जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका।
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि करीब छह माह पूर्व उन्होंने इस संबंध में प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी, लेकिन अब तक उन्हें भूमि पर अधिकार दिलाने अथवा कथित कब्जा हटाने को लेकर कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है।
करीब 70 एकड़ सरकारी व आदिवासी भूमि पर कब्जे का आरोप
ग्राम निवासी एवं दिव्यांग प्रार्थी उमेश कुमार शिवहरे ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 35, 34, 40, 41 एवं 04 में शामिल करीब 70 एकड़ भूमि सरकारी एवं आदिवासी भूमि से संबंधित है। प्रार्थी का आरोप है कि उक्त भूमि पर लाखन सिंह द्वारा कथित रूप से कब्जा किया गया है।
प्रार्थी के अनुसार मामले की शिकायत कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार सहित ग्राम पंचायत एवं स्थानीय विधायक से की जा चुकी है। इस संबंध में कई आवेदन एवं ज्ञापन सौंपे जाने तथा न्यायालय में भी आवेदन प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई कहां तक पहुंची?
शिकायतकर्ता उमेश कुमार शिवहरे का कहना है कि जब मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर लगातार शिकायतें प्रस्तुत की जा चुकी हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच कर मौके का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में उनके आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कथित अतिक्रमण हटाकर पात्र पट्टाधारकों को उनकी भूमि का कब्जा दिलाया जाए।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। भूमि पर वास्तविक स्वामित्व अथवा कब्जे की स्थिति राजस्व अभिलेखों, वैध दस्तावेजों, स्थल सीमांकन और सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
