कैमोर, जिला कटनी। सामाजिक जिम्मेदारी यानी CSR के नाम पर गांव और किसानों के हित में योजनाएं चलाने का दावा करने वाली एसीसी अदानी कंपनी अब गंभीर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। कैमोर क्षेत्र में “कृषि उद्यम” और पशुपालकों की सहायता के नाम पर संचालित गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर क्षेत्र में पशुओं के लिए चारे और गेहूं के भूसे की भारी कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर एसीसी अदानी प्रबंधन द्वारा बड़ी मात्रा में भूसा जलाया जा रहा है। यह सब उस समय हो रहा है जब जिला कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि भूसे और चारे की बर्बादी न हो तथा जरूरतमंद पशुपालकों तक सहायता पहुंचाई जाए। बावजूद इसके कंपनी के अधिकारी कथित रूप से निर्देशों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन किसानों और पशुपालकों के नाम पर योजनाएं संचालित दिखाई जा रही हैं, उन्हें न तो वास्तविक लाभ मिल रहा है और न ही योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। दूसरी ओर रिकॉर्ड में लाखों रुपये खर्च दर्शाकर CSR फंड के उपयोग का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि भूसा पशुओं के लिए खरीदा गया था, तो उसे खुलेआम जलाने की नौबत क्यों आई?
ग्रामीणों के अनुसार कई बार संबंधित अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे लोगों में यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं पूरा मामला केवल कागजी खानापूर्ति और फर्जी खर्च दिखाने तक सीमित तो नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि किसानों के नाम का उपयोग कर कंपनी अपनी छवि चमकाने में लगी हुई है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है।
क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि भीषण गर्मी और महंगाई के इस दौर में पशुओं के चारे की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे समय में भूसा जलाना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है।
लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि “कैमोर कृषि उद्यम” के नाम पर संचालित योजनाओं में पारदर्शिता पूरी तरह गायब है। आखिर किन किसानों को लाभ मिला, कितना भूसा वितरित किया गया और कितना नष्ट किया गया — इसका स्पष्ट जवाब किसी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है।
अब क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि CSR के नाम पर ग्रामीणों और किसानों को केवल दिखावा परोसा जा रहा है, तो यह सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ खुला धोखा है।
अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर मामला केवल जांच और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।
