
मिलन चौराहा-पाठक गली में 70 से 80 वर्षों से विराजित हो रहीं मां दुर्गा, पीढ़ियों से जारी है पूजा-अर्चना और सेवा का सिलसिला

कटनी। आस्था, श्रद्धा और परंपरा का संगम जब पीढ़ियों तक कायम रहता है, तो वह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक विरासत बन जाता है। शहर के जालपा वार्ड स्थित मिलन चौराहा-पाठक गली में मां दुर्गा की स्थापना की परंपरा भी ऐसी ही अनूठी मिसाल है। यहां पिछले 70 से 80 वर्षों से शारदेय नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा विराजित की जाती है। दशकों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

नवरात्र के नौ दिनों तक क्षेत्र के श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और सेवा में समर्पित रहते हैं। विधि-विधान से पूजन, आराधना और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। आयोजन से जुड़ा हर कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मां की सेवा में योगदान देता है। यह आयोजन स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के साथ आपसी सहयोग और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
पीढ़ियों से जुड़ा है आस्था का रिश्ता

इस धार्मिक परंपरा से पूर्व में मिलन कमेटी के सदस्य रहे कोमल सोनी भी जुड़े रहे हैं। वहीं वर्तमान में आयोजक एवं कार्यकर्ताओं की भूमिका में गणेश कुशवाहा, सुधीर सोनी, उम्मी पाठक, मुकेश पाठक, गोलू खम्परिया, शिवा बर्मन, अंकित खम्परिया और विजय रैकवार (जीजा) सहित अन्य सहयोगी आयोजन को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।
नौ दिनों तक माता रानी की सेवा ही प्रमुख उद्देश्य
नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और सेवा का क्रम जारी रहता है। आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता श्रद्धा के साथ व्यवस्थाओं में जुटे रहते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा का निरंतर निर्वहन इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक धरोहर भी है।
जालपा वार्ड के मिलन चौराहा-पाठक गली में मां दुर्गा की स्थापना की यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के मन में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित कर रही है।सात से आठ दशकों से जारी यह सिलसिला क्षेत्र की धार्मिक पहचान और सामूहिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
