
पीड़ित ने CMHO कार्यालय पहुंचकर की शिकायत, अधिवक्ता यश खरे बोले– मरीज की राशि वापस नहीं हुई तो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय तक लड़ेंगे लड़ाई
कटनी। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला कटनी में सामने आया है। माधवनगर स्थित कटनी लाइफ केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर एक मरीज के आयुष्मान कार्ड से बिना उपचार किए 50,100 रुपये का क्लेम प्राप्त करने का आरोप लगा है। पीड़ित का कहना है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उसके पैर में लगी रॉड निकालने का ऑपरेशन तक नहीं किया गया, इसके बावजूद अस्पताल के नाम पर आयुष्मान कार्ड से राशि का भुगतान दर्शाया गया। मामले को लेकर शुक्रवार 30 अक्टूबर को पीड़ित अतुल तिवारी अधिवक्ता यश खरे के साथ जिला चिकित्सालय स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जांच एवं कार्रवाई की मांग की।
ऑपरेशन का दिया आश्वासन, छह दिन बाद डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर किया डिस्चार्ज
शिकायतकर्ता अतुल तिवारी पिता सुशील तिवारी, उम्र लगभग 26 वर्ष, निवासी अमकुही जिला कटनी ने अपने आवेदन में बताया कि उनके दाहिने पैर में पहले से रॉड लगी हुई थी, जिसे निकलवाने के लिए उन्होंने 21 सितंबर 2026 को जिला चिकित्सालय कटनी में चेकअप कराया था। इसके बाद 23 सितंबर को उन्होंने माधवनगर स्थित कटनी लाइफ केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से संपर्क किया। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पैर में लगी रॉड निकालने का ऑपरेशन करने का आश्वासन देकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया।
पीड़ित के अनुसार 29 सितंबर 2026 को जब उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया, तब बताया गया कि रॉड निकालने वाले डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे किसी अन्य अस्पताल में जाकर ऑपरेशन करा लें। अतुल तिवारी का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनका प्रस्तावित ऑपरेशन नहीं किया गया और न ही उन्हें वह उपचार मिला, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ ऑपरेशन, आयुष्मान से 22,500 रुपये का भुगतान
इसके बाद पीड़ित 5 अक्टूबर 2026 को जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां उनकी आवश्यक जांच एवं फिटनेस संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई। शिकायत के अनुसार 12 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक उन्हें भर्ती रखकर पैर में लगी रॉड निकालने का सफल ऑपरेशन किया गया। इस उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज द्वारा उनके आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 22,500 रुपये का भुगतान प्राप्त किया गया।
ऑनलाइन आयुष्मान कार्ड चेक किया तो सामने आया 50,100 रुपये का क्लेम
मामले में नया मोड़ तब आया, जब पीड़ित अपने पैर की ड्रेसिंग एवं टांके खुलवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें आयुष्मान कार्ड के माध्यम से ड्रेसिंग एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी दी गई। इसके बाद जब उन्होंने ऑनलाइन अपना आयुष्मान कार्ड चेक कराया तो पता चला कि माधवनगर स्थित कटनी लाइफ केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम पर उनके कार्ड से 50,100 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
पीड़ित का कहना है कि जिस अस्पताल में उनके पैर की रॉड निकालने का ऑपरेशन नहीं हुआ, वहां से उपचार के नाम पर इतनी बड़ी राशि का क्लेम कैसे प्राप्त किया गया? उन्होंने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान किसी प्रकार का संबंधित ऑपरेशन या उपचार नहीं होने का दावा करते हुए इसे आयुष्मान कार्ड का कथित दुरुपयोग बताया है। पीड़ित ने शिकायत के साथ अस्पताल के बिल, संबंधित दस्तावेज एवं आयुष्मान कार्ड से भुगतान की जानकारी वाली स्लिप भी प्रस्तुत की है।
अधिवक्ता यश खरे बोले– कई मरीज चुप रह जाते हैं, अब इस मामले को अंत तक ले जाएंगे
मीडिया से चर्चा के दौरान अधिवक्ता यश खरे ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि कटनी जिले के कई नामचीन निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ इस तरह की कथित अनियमितताएं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन कई पीड़ित मरीज जानकारी के अभाव या अन्य कारणों से चुप रह जाते हैं और शिकायत करने के लिए आगे नहीं आते। अतुल तिवारी का यह मामला उनके संज्ञान में आया है, जिसमें मरीज का आरोप है कि बिना संबंधित उपचार किए उसके आयुष्मान कार्ड से 50,100 रुपये का क्लेम प्राप्त किया गया।
अधिवक्ता खरे ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसका लाभ जरूरतमंद मरीजों को मिलना चाहिए। यदि किसी अस्पताल द्वारा मरीज के नाम पर बिना वास्तविक उपचार के राशि का क्लेम किया गया है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। इस तरह की कथित अनियमितताओं पर रोक लगना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ ऐसी घटना न हो।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनके पक्षकार अतुल तिवारी के आयुष्मान कार्ड से संबंधित 50,100 रुपये की राशि वापस नहीं होती और संबंधित अस्पताल के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्तीकरण की मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे इस मामले को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक मरीज की राशि वापस दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी मरीज के साथ आयुष्मान योजना के नाम पर ऐसी कथित धोखाधड़ी दोबारा न हो।
CMHO से निष्पक्ष जांच और अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग
पीड़ित अतुल तिवारी ने CMHO को सौंपे गए शिकायत आवेदन में अस्पताल के आयुष्मान क्लेम, भर्ती एवं डिस्चार्ज रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज, ऑपरेशन की प्रविष्टियों और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित रूप से निकाली गई 50,100 रुपये की राशि वापस दिलाने और शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पताल के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए अस्पताल संचालन का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की गई है।
अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले ने कटनी में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले क्लेम और मरीजों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मरीज की शिकायत सही पाई जाती है तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुई कथित अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय होगा। अब देखना यह है कि CMHO कार्यालय और संबंधित स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। क्या अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान क्लेम की जांच होगी? क्या पीड़ित को उसकी राशि वापस मिल पाएगी? फिलहाल अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है और मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
