कटनी। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जिला कटनी द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा जारी पत्र पर रोक लगाने तथा इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने की मांग की है।संघ के जिला सचिव हरप्रीत सिंह ग्रोवर ‘लकी’ ने बताया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23(1) के तहत कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया गया है।
लेकिन वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इस नियम को लागू करना न्यायसंगत नहीं है।ज्ञापन में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा 3 मार्च 2026 को जारी पत्र में राज्य शासन, मंत्रिमंडल या स्कूल शिक्षा सचिवालय स्तर से किसी प्रकार की स्वीकृति या आदेश का उल्लेख नहीं है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के संबंध में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों की भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
संघ ने यह भी बताया कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षक संवर्ग की नियुक्तियां शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक व्यवस्था के तहत वर्ष 1997 से विभिन्न भर्ती नियमों के अनुसार हुई हैं। इन सेवा शर्तों में कहीं भी TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं बताया गया था।
ऐसे में नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में परिवर्तन करना सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के विपरीत है।संघ ने मांग की है कि लोक शिक्षण संचालनालय के उक्त पत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश सरकार भी सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करे।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शासन द्वारा इस विषय पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश के लगभग 3 लाख शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ को स्वयं सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करनी पड़ेगी।
