कलेक्टर के आदेश को चुनौती? प्रतिबंध के बावजूद निजी बोरिंग की अनुमति देने के आरोप, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल….
कटनी। जिले में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी आशीष तिवारी द्वारा निजी बोरवेल और नलकूप खनन पर लगाए गए सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद नियमों की अनदेखी कर निजी बोरिंग की अनुमति दिए जाने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से निजी बोरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था और केवल अत्यावश्यक शासकीय कार्यों को ही छूट दी गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा निजी बोरिंग की अनुमति जारी की जा रही है, जिसके चलते शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर बोरिंग कार्य खुलेआम जारी हैं।
गणेश चौक का मामला बना चर्चा का केंद्रताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के गणेश चौक स्थित जैन मंदिर के पास का बताया जा रहा है, जहां एक बोरिंग फेल होने के बाद दूसरी बोरिंग का कार्य शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने अनुमति पत्र देखने के बाद कार्रवाई से परहेज किया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।अनुमति पर उठे गंभीर सवालस्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि कलेक्टर द्वारा निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लागू है, तो फिर अनुमति जारी किस आधार पर की जा रही है।
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या अनुमति देते समय भूजल संकट और पेयजल आपूर्ति जैसी अनिवार्य शर्तों को शामिल किया जा रहा है या नहीं। आरोप है कि कई अनुमति पत्रों में आवश्यक शर्तों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे मनमानी की आशंका को बल मिल रहा है।
प्रतिबंधात्मक आदेश की अनदेखी पर सख्त निर्देशकटनी कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट प्रावधान है कि बिना विधिवत अनुमति के किसी भी प्रकार की बोरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आदेश के उल्लंघन पर मशीन जप्ती, बोरिंग बंद कराने और आपदा प्रबंधन अधिनियम सहित अन्य सख्त धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके सामने आ रहे मामलों ने आदेशों के प्रभावी पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवालइस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
नागरिकों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रतिबंध के बावजूद निजी बोरिंग की अनुमति किन परिस्थितियों में और किस स्तर पर जारी हो रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे ही नियमों की अनदेखी होती रही, तो भूजल संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है और प्रशासन के आदेशों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।
