
कटनी। शहर के मूंगा बाई कॉलोनी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड में भूमि पर कथित अवैध कब्जे और उसके बाद प्लॉटिंग किए जाने की शिकायत ने एक बार फिर शहर में पनप रहे अवैध कॉलोनाइजेशन के कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए खसरा रिकॉर्ड में अलग-अलग खसरा नंबरों एवं रकबे का उल्लेख है। ऐसे में मौके पर किए जा रहे कब्जे और भूमि के वास्तविक राजस्व रिकॉर्ड का सीमांकन एवं सत्यापन कराया जाना बेहद जरूरी है।
पहले कब्जा, फिर प्लॉटिंग और बाद में खरीदारों की परेशानी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा अथवा अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विभागों की निगरानी कहां थी? समय रहते कार्रवाई नहीं होने का खामियाजा आखिरकार उस आम नागरिक को क्यों भुगतना पड़े, जिसने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर जमीन खरीदी?
रोड-नाली और मूलभूत सुविधाओं पर भी संकट
अवैध प्लॉटिंग में अक्सर नियमानुसार लेआउट, सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था का सवाल खड़ा होता है। बाद में रहवासी जब नगर निगम अथवा शासन से सड़क, नाली और अन्य सुविधाओं की मांग करते हैं तो भूमि/कॉलोनी की वैधानिक स्थिति सामने आने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
कटनी में अवैध कब्जे और अवैध कॉलोनियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के उदाहरण भी सामने आए हैं। हाल ही में कटनी में अवैध कॉलोनी निर्माण और बिना डायवर्जन जमीन बेचने के मामलों में पुलिस ने नगर निगम की रिपोर्ट एवं जांच के आधार पर प्रकरण दर्ज किए हैं। � वहीं अगस्त 2026 में माधवनगर क्षेत्र में नजूल भूमि पर कथित कब्जे के विरुद्ध प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
दस्तावेजों की जांच कराए प्रशासन
मूंगा बाई कॉलोनी में सामने आए मामले में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित खसरा नंबर किसके नाम दर्ज हैं, भूमि का वास्तविक रकबा कितना है, भूमि का डायवर्जन हुआ है या नहीं, प्लॉटिंग के लिए सक्षम अनुमति/लेआउट स्वीकृत है या नहीं और मौके पर वर्तमान कब्जा किसका है।
प्रदेश शासन के एंटी भू-माफिया पोर्टल पर भी सरकारी एवं निजी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतों के लिए व्यवस्था उपलब्ध है और ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है।
प्रशासन से मांग—कब्जा हटाने से पहले जिम्मेदारों तक पहुंचे जांच
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मामले में अवैध कब्जा या अवैध प्लॉटिंग प्रमाणित होती है तो केवल वर्तमान रहवासियों या खरीदारों पर कार्रवाई करने के बजाय सबसे पहले जमीन पर कब्जा करने, प्लॉटिंग करने और भूखंड बेचने वाले जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
साथ ही राजस्व विभाग, नगर निगम और पंजीयन विभाग के रिकॉर्ड का आपसी मिलान कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह किस स्तर पर हुई।
अब देखने वाली बात यह है कि मूंगा बाई कॉलोनी के इस मामले में प्रशासन केवल शिकायत दर्ज कर खानापूर्ति करता है या मौके पर सीमांकन कराकर कथित अवैध कब्जे और प्लॉटिंग की पूरी श्रृंखला की जांच करते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करता है।
