
रिटायर अधिकारी के बाद भी रिश्तेदार के प्रभाव का दावा, आरटीओ व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग
कटनी। जिला परिवहन कार्यालय (आरटीओ), कटनी की कार्यप्रणाली को लेकर समाजसेवी इंद्रा मिश्रा ने गंभीर सवाल उठाते हुए कलेक्टर कार्यालय में शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने आरटीओ कार्यालय को दलालों एवं एजेंटों के प्रभाव से मुक्त कर आम नागरिकों के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

शिकायत में इंद्रा मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिला परिवहन कार्यालय में लंबे समय से दलालों का हस्तक्षेप बना हुआ है, जिसके कारण ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीयन, नामांतरण, परमिट सहित अन्य कार्यों के लिए आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी संचालकों द्वारा लोगों को गुमराह कर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है।
समाजसेवी ने शिकायत में कहा कि आरटीओ कार्यालय के आसपास अस्थायी टपरे एवं ऑनलाइन कार्य केंद्रों के माध्यम से कथित रूप से दलाली का काम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन कार्यों में विभागीय प्रक्रिया के तहत अधिक समय लगता है, वही कार्य बाहरी संचालकों के माध्यम से कम समय में पूरे हो जाते हैं, जिससे व्यवस्था पर संदेह उत्पन्न होता है।
“रिटायरमेंट के बाद भी प्रभाव बरकरार” का लगाया आरोप
शिकायत में इंद्रा मिश्रा ने आरोप लगाया कि एक पूर्व अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके रिश्तेदार का आरटीओ कार्यालय में प्रभाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में बाहरी लोगों का कितना हस्तक्षेप है।
उन्होंने आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की उपलब्धता और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं।
कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग
समाजसेवी ने कलेक्टर से आरटीओ कार्यालय परिसर एवं आसपास सक्रिय दलालों और अवैध ऑनलाइन केंद्रों के विरुद्ध अभियान चलाने, अवैध टपरे एवं काउंटर हटाने, कार्यालय परिसर में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने, कर्मचारियों एवं दलालों के बीच संभावित मिलीभगत की जांच कराने तथा आम नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और शिकायत व्यवस्था शुरू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि परिवहन कार्यालय में सभी सेवाएं निर्धारित शासकीय शुल्क पर उपलब्ध कराने की जानकारी देने वाले सूचना-पट्ट लगाए जाएं, जिससे आम जनता को दलालों के माध्यम से कार्य कराने की आवश्यकता न पड़े।
आरटीओ विभाग का पक्ष नहीं आया सामने
मामले में अभी तक आरटीओ विभाग या संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। शिकायत के आधार पर प्रशासन द्वारा जांच और कार्रवाई किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
