
शारदेय नवरात्र की सप्तमी पर देवी मंदिर में कन्या भोज एवं भंडारे का आयोजन, 19 अक्टूबर को नवमी पर दोनों पंडालों में होंगे धार्मिक आयोजन
कटनी। शारदेय नवरात्र के पावन पर्व पर शहर के उपनगरीय क्षेत्र छपरवाह में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। मां दुर्गा और मां काली की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना के साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। सुबह-शाम माता की आरती, पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की उपस्थिति से क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

क्षेत्र के बर्मन मोहल्ला स्थित देवी मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है, वहीं विश्वकर्मा मोहल्ला में मां काली की भव्य एवं आकर्षक प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नवरात्र की बैठकी से शुरू हुआ पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार जारी है। दोनों ही स्थानों पर प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली आरती में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल होकर मां जगत जननी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। बर्मन मोहल्ला स्थित देवी मंदिर में सुबह से ही माता को जल अर्पित करने के लिए भक्तों के पहुंचने का क्रम जारी रहता है।
सप्तमी पर कन्या भोज एवं भंडारे में उमड़ी श्रद्धा
शारदेय नवरात्र की सप्तमी के पावन अवसर पर देवी भक्त जूली महाराज की ओर से बर्मन मोहल्ला स्थित देवी मंदिर में कन्या भोज एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। कन्याओं को भोजन कराने के साथ श्रद्धालुओं ने भंडारे में माता का प्रसाद ग्रहण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और सेवा भाव से परिपूर्ण नजर आया।
नवमी पर दोनों पंडालों में होंगे कन्या भोज और भंडारे

नवरात्र के आगामी नवमी पर्व पर 19 अक्टूबर को बर्मन मोहल्ला स्थित देवी मंदिर एवं विश्वकर्मा मोहल्ला के दुर्गा पंडाल में संबंधित दुर्गा समितियों की ओर से अलग-अलग कन्या भोज एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समितियों ने क्षेत्रवासियों से इन धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर माता का प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
दशहरे पर प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा समापन
छपरवाह क्षेत्र में नवरात्र के दौरान आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों का समापन 20 अक्टूबर को दशहरे के पावन अवसर पर प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा। मां दुर्गा और मां काली की आराधना के बीच क्षेत्र में श्रद्धा, सामाजिक सहभागिता और धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
