
भारतीय मानक ब्यूरो की पहल, हॉलमार्किंग से लेकर उपभोक्ता संरक्षण तक दी गई जानकारी; सतत विकास लक्ष्य-7 पर रहा विशेष फोकस
कटनी। विश्व मानक दिवस-2026 के अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में सोमवार, 12 अक्टूबर को होटल द अरिंदम, कटनी में स्टेकहोल्डर्स कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम ‘बेहतर विश्व के लिए साझा दृष्टिकोण’ रही। इसमें सतत विकास लक्ष्य-7 (SDG-7) के अंतर्गत किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उपभोक्ता जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की गई।
भारतीय मानक ब्यूरो की भूमिका पर प्रकाश
कार्यक्रम में भारतीय मानक ब्यूरो की स्थापना, इतिहास और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी गई। बताया गया कि बीआईएस, बीआईएस अधिनियम-2016 के अंतर्गत स्थापित भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है। इसका प्रमुख कार्य मानकीकरण, उत्पाद प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा से जुड़ा है।
भारतीय मानक ब्यूरो की शुरुआत भारतीय मानक संस्था (ISI) के रूप में 6 जनवरी 1947 को हुई थी। वर्ष 1955 में प्रमाणन मुहर योजना शुरू की गई, जबकि बीआईएस की स्थापना 1 अप्रैल 1987 को हुई। वर्तमान में संस्था मानक निर्धारण, उत्पाद प्रमाणन, प्रयोगशाला परीक्षण, अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और प्रशिक्षण सेवाओं के माध्यम से गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रही है।
मानकीकरण से उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर
कॉन्क्लेव में बताया गया कि भारतीय मानक ब्यूरो विभिन्न तकनीकी समितियों के माध्यम से भारतीय मानक तैयार करता है। इन समितियों में विषय विशेषज्ञों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों, उद्योगों, प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिकों की भागीदारी रहती है।
भारतीय मानक उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीआईएस उत्पाद प्रमाणन के माध्यम से निर्माताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। कुछ उत्पादों के लिए जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा प्रमाणन अनिवार्य भी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, बीआईएस गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा प्रबंधन और व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन भी प्रदान करता है।
सोने-चांदी की हॉलमार्किंग से शुद्धता की पहचान
कार्यक्रम में सोने और चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग को लेकर उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। बताया गया कि हॉलमार्क बहुमूल्य धातुओं की शुद्धता और निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप होने की पहचान है।
सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग वर्ष 2000 में तथा चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग वर्ष 2005 में शुरू हुई थी। सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क के अंतर्गत बीआईएस का मानक चिह्न, शुद्धता दर्शाने वाला अंक और छह अंकों का विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक HUID कोड शामिल होता है।
चांदी के हॉलमार्क में भी बीआईएस का मानक चिह्न, शुद्धता ग्रेड और छह अंकों का विशिष्ट कोड शामिल होता है। बीआईएस की जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए HUID-आधारित हॉलमार्किंग की व्यवस्था शुरू की गई।
आभूषण खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
उपभोक्ताओं को सलाह दी गई कि सोने या चांदी के आभूषण खरीदते समय बीआईएस-पंजीकृत ज्वैलर से ही खरीदारी करें। आभूषण पर अंकित हॉलमार्क और HUID कोड की प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है।
इसके लिए बीआईएस केयर ऐप का उपयोग किया जा सकता है। खरीदारी के बिल में आभूषण या कलाकृति का नाम, वजन, शुद्धता और हॉलमार्किंग शुल्क जैसे विवरण दर्ज होने चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बीआईएस-पंजीकृत ज्वैलर आभूषणों की परख एवं हॉलमार्किंग के लिए बीआईएस से मान्यता प्राप्त एसेइंग एवं हॉलमार्किंग केंद्रों की सेवाएं लेते हैं। निर्धारित शुल्क की जानकारी उपभोक्ताओं और संबंधित हितधारकों के लिए उपयोगी है।
बीआईएस केयर ऐप से उपभोक्ता होंगे सशक्त
कॉन्क्लेव में बीआईएस केयर ऐप की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता हॉलमार्क वाले आभूषणों की प्रामाणिकता जांचने, भारतीय मानकों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने और गुणवत्ता संबंधी शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को उत्पादों पर अंकित प्रमाणन चिह्नों की पहचान करने तथा किसी भी वस्तु की गुणवत्ता को लेकर जागरूक रहने का संदेश दिया गया। बीआईएस की वेबसाइट पर पंजीकृत ज्वैलर्स और प्रमाणन संबंधी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।
प्रयोगशाला, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान बीआईएस की प्रयोगशाला व्यवस्था, प्रशिक्षण सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई। बताया गया कि संस्था उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूपता की जांच के लिए अपनी प्रयोगशालाओं के साथ मान्यता प्राप्त बाहरी प्रयोगशालाओं की सेवाएं भी लेती है।
राष्ट्रीय मानकीकरण प्रशिक्षण संस्थान (NITS) उद्योगों, प्रयोगशालाओं, तकनीकी समितियों के सदस्यों और बीआईएस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके अलावा, विभिन्न देशों के प्रतिभागियों के लिए भी मानकीकरण, प्रमाणन और प्रयोगशाला परीक्षण से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्थाओं के साथ मिलकर मानकों के निर्माण और उनके सामंजस्य की प्रक्रिया में भी भागीदारी करता है।
स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास पर विशेष जोर
विश्व मानक दिवस-2026 के अंतर्गत आयोजित इस कॉन्क्लेव का प्रमुख केंद्र सतत विकास लक्ष्य-7 रहा, जिसका उद्देश्य सभी के लिए किफायती, विश्वसनीय, सतत और आधुनिक ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, विश्वसनीय विद्युत ग्रिड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विषयों पर जोर दिया गया। इन क्षेत्रों में गुणवत्ता मानकों का पालन ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग, तकनीकी विश्वसनीयता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में सहायक है।
कॉन्क्लेव के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानकीकरण केवल उत्पादों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित उपभोग, उद्योगों के विकास, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कटनी में आयोजित स्टेकहोल्डर्स कॉन्क्लेव ने मानकीकरण, उपभोक्ता संरक्षण, हॉलमार्किंग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों को भारतीय मानकों के महत्व से अवगत कराना तथा गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करना रहा।
