
आजाद चौक से गाटर घाट और चांडक चौक–रविदास चौराहा तक वाहनों की लंबी कतारें, नगर निगम की अतिक्रमण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कटनी। शहर में बढ़ता अतिक्रमण, सड़क किनारे बेतरतीब वाहन पार्किंग और लगातार बढ़ता यातायात दबाव अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। सोमवार को आजाद चौक से गाटर घाट मार्ग तक वाहनों की लंबी कतारें नजर आईं, वहीं चांडक चौक से रविदास चौराहा मार्ग तक भारी वाहनों की कतार के कारण यातायात प्रभावित रहा।

आजाद चौक की संकरी सड़कों पर जगह-जगह दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग के चलते सड़क पर आवागमन के लिए उपलब्ध जगह और कम हो गई। यही स्थिति मिशन चौक से चांडक चौक तक भी दिखाई देती है, जहां सड़क के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग और कई स्थानों पर सड़क तक फैला अतिक्रमण यातायात में बाधा बन रहा है।
अतिक्रमण हटाने की जगह चालान और फिर वही अतिक्रमण?
शहर में अतिक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर सबसे गंभीर सवाल उस समय खड़ा होता है, जब आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण हटाने के बजाय ₹500 का चालान काटकर अतिक्रमणकारियों को सड़क किनारे फिर से जगह घेरने का रास्ता मिल जाता है।
यदि वास्तव में चालान की कार्रवाई के बाद भी उसी स्थान पर अतिक्रमण जारी रहने दिया जा रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए है या केवल जुर्माना वसूलकर अतिक्रमण को जारी रखने की व्यवस्था बन रही है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नगर निगम का अतिक्रमण अमला अतिक्रमण हटाने के बजाय केवल चालान की कार्रवाई तक सीमित रहता है, तो शहर को अतिक्रमणमुक्त कैसे किया जाएगा?
नगर निगम की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल
अतिक्रमण नियंत्रण और सार्वजनिक मार्गों को बाधामुक्त रखने में नगर निगम की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के बीच नगर निगम की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
यदि कार्रवाई के बाद भी उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण हो जाता है और सड़क का हिस्सा फिर से घिर जाता है, तो केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। सवाल यह है कि
‘परवानगी’ के आरोप की होनी चाहिए जांच
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि चालान की कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमणकारियों को दोबारा सड़क किनारे दुकान, ठेला या अन्य सामग्री लगाने से प्रभावी रूप से नहीं रोका जाता। यदि ऐसा हो रहा है तो यह जांच का विषय है कि क्या कहीं कार्रवाई के नाम पर अतिक्रमण को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा तो नहीं मिल रहा?
नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि ₹500 के चालान के बाद संबंधित स्थान से अतिक्रमण वास्तव में हटाया जाता है या नहीं, और यदि दोबारा अतिक्रमण होता है तो जिम्मेदार अमला उसके खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
सड़क छोटी, अतिक्रमण बड़ा और पार्किंग ने बढ़ाई मुश्किल
शहर में स्थिति यह बनती जा रही है कि जहां सड़क पहले से संकरी है, वहीं अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग का दबाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है। इसका परिणाम वाहनों की लंबी कतार और जाम के रूप में सामने आ रहा है।
आजाद चौक से गाटर घाट, मिशन चौक से चांडक चौक तथा चांडक चौक से रविदास चौराहा तक यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए केवल मौके पर यातायात पुलिस की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होगी। सड़क की वास्तविक उपलब्ध चौड़ाई बनाए रखने, अतिक्रमण हटाने और पार्किंग को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम तथा यातायात विभाग को समन्वित कार्रवाई करनी होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सड़क पर अतिक्रमण बढ़ता जाएगा और उसे हटाने के बजाय केवल चालान की कार्रवाई होती रहेगी, तो आखिर कटनी शहर अतिक्रमणमुक्त कैसे होगा और यातायात व्यवस्था कब पटरी पर आएगी?
