
बंदी स्टेशन-स्लीमनाबाद के करीब 20 परिवार पांच वर्षों से रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए भटक रहे, 1989 की कथित राजस्व त्रुटि सुधारने की मांग

स्लीमनाबाद। जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से आयोजित जन विश्वास शिविर स्लीमनाबाद में राजस्व अभिलेखों में सुधार से जुड़ी एक पुरानी समस्या सामने आई। बंदी स्टेशन क्षेत्र के करीब 20 परिवारों ने आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में वर्षों पुरानी त्रुटि के कारण वे लगातार रिकॉर्ड सुधार के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मामला कई स्तरों पर जांच और प्रतिवेदन के बाद भी अब तक निर्णायक रूप से नहीं सुलझ सका है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1981 में खसरा क्रमांक 557/1ग को आबादी एवं आवास योजना के लिए सुरक्षित किया गया था। इसके बाद तत्कालीन तहसीलदार न्यायालय, सिहोरा द्वारा करीब 15 पट्टे भी जारी किए गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि इन भूखंडों पर लगभग पांच दशक से मकान बने हुए हैं और परिवार लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाद में हुई बंदोबस्ती एवं राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन के दौरान कथित त्रुटि के चलते वर्तमान अभिलेखों में भूमि की स्थिति अलग तरीके से दर्ज हो गई। उनका कहना है कि वर्ष 1989 के राजस्व संशोधन में हुई त्रुटि को सुधारने के लिए कई बार आवेदन दिए गए।
जांच और प्रतिवेदन के बाद भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई में आवेदन दिए जाने के बाद भू-अभिलेख विभाग की ओर से मामले में प्रतिवेदन भी तैयार किया गया। इसके बाद कलेक्टर न्यायालय के स्तर से प्रकरण को एसडीएम बहोरीबंद के माध्यम से पटवारी एवं तहसीलदार से जांच कराने की प्रक्रिया भी हुई। ग्रामीणों के अनुसार, जांच के दौरान रिकॉर्ड की स्थिति को लेकर प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अलग-अलग स्तरों पर दस्तावेज और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद भी उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि करीब पांच वर्षों से 20 परिवार इस समस्या के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विधायक और सांसद को भी दिए आवेदन
ग्रामीणों ने बताया कि रिकॉर्ड सुधार की मांग को लेकर स्थानीय विधायक एवं सांसद के समक्ष भी आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में सुधार नहीं होने से उन्हें शासन की स्वामित्व योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब राजस्व अभिलेखों में त्रुटि सामने आने के बाद संबंधित विभागों द्वारा जांच एवं प्रतिवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, तो अंतिम रूप से रिकॉर्ड दुरुस्त करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
महाअभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि शासन द्वारा राजस्व रिकॉर्ड सुधार एवं स्वामित्व संबंधी मामलों के निराकरण के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं और इनके व्यापक प्रचार-प्रसार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वर्षों से लंबित मामलों का समाधान नहीं होने से राजस्व महाअभियान की जमीनी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की समयबद्ध समीक्षा कर पुराने राजस्व रिकॉर्ड, वर्ष 1981 के पट्टों तथा वर्ष 1989 में हुए संशोधन से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए और यदि अभिलेखीय त्रुटि प्रमाणित होती है तो नियमानुसार रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार कर परिवारों को राहत प्रदान की जाए।
