
हजारों यात्रियों के बीच कचरे का ‘स्वागत द्वार’, बारिश ने खोली सफाई व्यवस्था की पोल; जनता का सवाल—जब सफाई नहीं तो ठेकेदारों को भुगतान क्यों?
कटनी। स्वच्छता मिशन के नाम पर बड़े-बड़े दावे, बैठकों में समीक्षा, कागजों पर उपलब्धियां और प्रचार में चमकती तस्वीरें… लेकिन जमीनी हकीकत देखनी हो तो कटनी के प्रियदर्शनी बस स्टैंड का रुख कर लीजिए। यहां यात्रियों का स्वागत किसी साफ-सुथरे परिसर से नहीं, बल्कि जगह-जगह पड़े कचरे और कूड़े के ढेर से हो रहा है। बारिश के बाद सड़ता कचरा और गंदगी नगर निगम की सफाई व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसे शायद सरकारी फाइलों में जगह नहीं मिलती।
सवाल सीधा है—जब शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल की सफाई तक नहीं हो पा रही, तो सफाई के नाम पर खर्च होने वाली राशि आखिर जा कहां रही है? सफाई ठेकेदारों को भुगतान किस काम के बदले किया जा रहा है? जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं या स्वच्छता की रिपोर्ट केवल कार्यालयों में बैठकर तैयार हो रही है?
प्रियदर्शनी बस स्टैंड से प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है। इसके बावजूद परिसर में जगह-जगह फैली गंदगी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रही है। बस ऑपरेटरों और यात्रियों का कहना है कि कई स्थानों पर हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना तो दूर, कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। बारिश के बीच जमा कचरा अब दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे की आशंका भी बढ़ा रहा है।
वसूली में मुस्तैदी, सफाई में सुस्ती क्यों?
नगर निगम बस और ऑटो चालकों से निर्धारित शुल्क की वसूली करता है। वसूली के लिए व्यवस्था है, कर्मचारी हैं और नियम भी हैं। लेकिन जब सवाल सफाई और यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं देने का आता है, तो वही व्यवस्था आखिर कहां गायब हो जाती है?
वाहन चालकों और आम जनता का सवाल है—जब बस स्टैंड परिसर को साफ रखने की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो रही, तो शुल्क किस सुविधा के बदले लिया जा रहा है? क्या नगर निगम की जिम्मेदारी केवल पैसे वसूलने तक सीमित रह गई है?
क्या अधिकारियों को दिखाई नहीं देता कचरा?
शहर के प्रमुख बस स्टैंड पर जगह-जगह पड़े कचरे के ढेर कोई छिपी हुई समस्या नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी मौके पर निरीक्षण करने पहुंचते हैं? यदि निरीक्षण होता है तो गंदगी क्यों नहीं हटती, और यदि निरीक्षण ही नहीं होता तो फिर सफाई व्यवस्था की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
कागजों पर स्वच्छता, जमीन पर कचरा!
स्वच्छता अभियान की सफलता का आकलन यदि केवल बैठकों, रिपोर्टों और सरकारी पन्नों से किया जाए तो शायद तस्वीर बेहद खूबसूरत नजर आए। लेकिन प्रियदर्शनी बस स्टैंड की जमीन पर पड़ा कचरा इन दावों की चमक पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसा लगता है कि शहर में सफाई से ज्यादा सफाई के दावों को चमकाने पर जोर है।
अब जनता नगर निगम और जिला प्रशासन से जवाब चाहती है—सफाई ठेकेदारों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? उनकी कार्यप्रणाली की जांच कब होगी? लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी या फिर कचरे के ढेर के बीच भी स्वच्छता मिशन की सफलता के दावे जारी रहेंगे?
फिलहाल प्रियदर्शनी बस स्टैंड की बदहाल तस्वीर यही सवाल पूछ रही है—“नगर निगम साहब! वसूली पूरी है, तो सफाई अधूरी क्यों?”
