
कंप्यूटर ऑपरेटर का आरोप—चार माह तक किया काम, मानदेय नहीं मिला; 181 शिकायत पर भी नहीं मिली राहत, निरीक्षण अधिकारी पर ₹4 हजार लेकर मामला रफादफा करने का आरोप….

कटनी। शासन की योजनाओं में पारदर्शिता और आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत रोहनियां की पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर अंकिता अहिरवार ने कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी मेहनत की कमाई दिलाने की गुहार लगाई है। युवती का आरोप है कि चार माह तक पंचायत में पूरी ईमानदारी से कार्य करने के बावजूद आज तक उसका मानदेय नहीं दिया गया।
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के अनुसार, अंकिता अहिरवार ने ग्राम पंचायत रोहनियां में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य करते हुए आयुष्मान कार्ड, समग्र आईडी, पंचायत के कंप्यूटर संबंधी कार्य, योजनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग सहित अन्य शासकीय दायित्व समय पर पूरे किए। इसके बावजूद कार्य समाप्त होने के बाद उसका बकाया मानदेय रोक लिया गया।
पीड़िता का कहना है कि न्याय की उम्मीद में उसने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण अधिकारी ने वेतन की राशि ₹14 हजार होने की बात स्वीकार करते हुए 14 हजार में मात्र ₹4 हजार लेकर समझौता करने का दबाव बनाया। जब उसने समझौता करने से इनकार किया, तो उसकी सहमति के बिना ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत बंद कर दी गई।
अब पीड़िता ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए उसके कार्यों का सत्यापन कराने और बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है।
उठ रहे बड़े सवाल
यह मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी जनहितकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। शासन ने 181 हेल्पलाइन इसलिए शुरू की थी ताकि आम नागरिकों की शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान हो सके। लेकिन यदि शिकायतकर्ता की सहमति के बिना शिकायतें बंद की जा रही हैं या समझौते का दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आते हैं, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
यदि आवेदन में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक युवती के मानदेय का मामला नहीं, बल्कि शिकायत निवारण प्रणाली की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल है। फिलहाल मामले की सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
