
केरल के भक्ति बैंड, छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोकनृत्य और 1100 दीपों की महाआरती बने मुख्य आकर्षण, हजारों श्रद्धालुओं ने किए महाप्रभु के दर्शन…
कटनी। आस्था, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के बीच गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी की 144वीं ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव पूरे धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। बारिश की हल्की फुहारें भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकीं। जगन्नाथ चौक स्थित श्री जगदीश स्वामी मंदिर से सुसज्जित भव्य रथ पर विराजमान भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा माता नगर भ्रमण के लिए निकले तो पूरा शहर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठा।
रथयात्रा प्रारंभ होने से पूर्व सरावगी परिवार द्वारा भगवान को नवीन पोशाक अर्पित की गई। इसके बाद विधि-विधान से महाआरती कर प्रसाद का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दिव्य दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
रथयात्रा में इस वर्ष छत्तीसगढ़ का पारंपरिक आदिवासी लोकनृत्य एवं केरल का भक्ति बैंड विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मंदिर परिसर में भगवान श्री जगन्नाथ की 1100 दीपों से भव्य महाआरती की गई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात रथयात्रा आजाद चौक, शेर चौक, सुक्खन चौक, झंडा बाजार और सुभाष चौक होते हुए सब्जी मंडी स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर पहुंची, जहां स्थयात्रा का समापन हुआ।
रथयात्रा से एक दिन पूर्व बुधवार शाम विशाल वाहन रैली निकाली गई। यह रैली जगन्नाथ स्वामी मंदिर से प्रारंभ होकर घंटाघर, शहीद द्वार, स्टेशन रोड, शेर चौक और आजाद चौक होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। रैली में यूथ कटनी, नारी शक्ति, श्री काल भैरव समिति, शिव शक्ति महिला मंडल सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु शामिल हुए। महोत्सव के सफल आयोजन में मिलन ग्रुप, महिला मंडल एवं बजरंग बाल रामायण समाज परिवार का विशेष सहयोग रहा।
स्थयात्रा महोत्सव के दौरान आजाद चौक में बागेश्वर धाम शिष्य मंडल द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य महाआरती की गई। शिष्य मंडल ने बताया कि इसी दिन बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्मोत्सव भी है। इसी अवसर पर वापसी रथयात्रा के दौरान भी आजाद चौक में महाआरती आयोजित की जाएगी। मंडल ने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में शामिल होकर महाआरती में सहभागिता निभाने की अपील की।
बारिश की बूंदों के बीच निकली इस ऐतिहासिक रथयात्रा ने कटनी को एक बार फिर भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा के रंग में रंग दिया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और जयघोषों से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
