
गंदा पानी, तीन दिन से बिजली गुल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल; जिला अस्पताल में भर्ती छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ी, लेकिन देर शाम तक न शिक्षा विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी पहुंचा, न जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि…
कटनी। कटनी जिले के एनकेजे थाना क्षेत्र अंतर्गत सरसवाही के पास संचालित शासकीय कन्या छात्रावास से सामने आया मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। शुरुआती तौर पर जहां छह छात्राओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहीं कुछ ही देर बाद आधा दर्जन से अधिक छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भी अस्पताल लाया गया। इनके साथ छात्रावास की प्रभारी प्राचार्य को भी भर्ती कराया गया, जिनकी हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है।
जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. राजीव द्विवेदी ने बताया कि शनिवार, 18 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे छात्रावास से पहली खेप में छह छात्राओं को अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान छात्राओं ने बताया कि उन्हें शुक्रवार शाम से ही पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ और सीने में जलन की शिकायत थी। शनिवार सुबह नाश्ता करने के बाद उनकी तबीयत अचानक अधिक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया।
कुछ ही समय बाद छात्रावास की प्रभारी प्राचार्य सहित अन्य छात्राओं की भी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें भी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद अस्पताल में भर्ती छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।
प्राथमिक जानकारी में छात्राओं ने यह भी बताया कि पिछले तीन दिनों से छात्रावास में गंदा और अशुद्ध पानी आ रहा था, जो पीने योग्य नहीं था, लेकिन मजबूरी में उसी का सेवन किया जा रहा था। इसके अलावा लगातार तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण छात्राओं को उमस भरी गर्मी में बिना पंखे और पर्याप्त सुविधाओं के रहना पड़ रहा था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना गंभीर मामला सामने आने और आधा दर्जन से अधिक छात्राओं के जिला अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद देर शाम तक न तो शिक्षा विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचा और न ही जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर छात्राओं का हालचाल जानने या पूरे मामले की जानकारी लेने पहुंचा। इससे प्रशासनिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह पूरा मामला अब छात्रावास की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि छात्राओं की शिकायतों के अनुसार लंबे समय से गंदे पानी और बिजली की समस्या बनी हुई थी, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आखिर छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बाद ही प्रशासन सक्रिय क्यों दिखाई दिया?
फिलहाल सभी छात्राओं और प्रभारी प्राचार्य का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। स्वास्थ्य खराब होने के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। वहीं पूरे मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
