कटनी।शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अक्सर नगर निगम पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन बीते कुछ दिनों की एक घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हर विरोध वास्तव में सही तथ्यों पर आधारित होता है?मामला कटनी जिला अस्पताल मार्ग स्थित एसबीआई बैंक के सामने बजरंग बली मंदिर के पास का है, जहां एक महिला सब्जी विक्रेता द्वारा सड़क पर बैठकर अतिक्रमण कर सब्जी विक्रय किया जा रहा था। कुछ दिन पहले जब नगर निगम अतिक्रमण विभाग की टीम वहां पहुंची और महिला को दुकान हटाने के निर्देश दिए, तो मौके पर मौजूद कुछ नागरिकों ने अतिक्रमण विभाग का विरोध शुरू कर दिया।

विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि नगर निगम केवल गरीब पथ व्यापारियों पर कार्रवाई करता है, जबकि बड़े व्यापारियों पर कोई सख्ती नहीं दिखाई जाती।हालांकि, कुछ दिनों बाद वही महिला उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण करते हुए पाई गई। इस बार स्थिति और भी गंभीर थी, क्योंकि महिला शराब के नशे में धुत होकर सड़क पर दुकान लगाए मिली।
जब अतिक्रमण विभाग का अमला पुनः कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा, तो इस बार न तो कोई विरोध सामने आया और न ही पहले की तरह महिला के समर्थन में कोई आवाज उठी।
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पहले किया गया विरोध भावनाओं में बहकर किया गया था? क्या अतिक्रमण के पीछे की सच्चाई सामने आने पर समर्थकों ने चुप्पी साध ली?स्थानीय लोगों का कहना है कि पथ व्यापारियों के अधिकार जरूरी हैं, लेकिन नियमों का पालन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन पर की जाती है। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि किसी भी कार्रवाई का विरोध करने से पहले तथ्यों को जानना कितना जरूरी है।
अब देखना यह होगा कि भविष्य में अतिक्रमण और पथ व्यापार से जुड़े मामलों में नागरिकों का रुख भावनाओं से नहीं, बल्कि सच्चाई और नियमों के आधार पर तय होता है या नहीं।
