
त्योहार के मौके पर करवा बेचने वाले फुटकर व्यापारियों पर कार्रवाई से नाराजगी, आयुक्त की गैरमौजूदगी में किसके निर्देश पर चला निगम का अमला?
शहर में सवाल—क्या छोटे दुकानदारों के लिए नियम ही नियम, राहत और वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी?
कटनी। त्योहारों पर बाजारों में रौनक बढ़ती है, लोग खरीदारी करते हैं और छोटे फुटकर व्यापारी भी कुछ दिनों की कमाई से अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन करवा चौथ जैसे महत्वपूर्ण पर्व के अवसर पर करवा बेचकर आजीविका चलाने वाले छोटे व्यापारियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्रवाई को लेकर शहर में नाराजगी सामने आई है। समाजसेवी इंद्र मिश्रा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर नगर निगम के रवैये पर आक्रोश जताया और जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए हैं।
त्योहार के समय करवा और पूजन सामग्री की बिक्री करने वाले फुटकर व्यापारी बड़े कारोबारी नहीं, बल्कि सीमित पूंजी के सहारे अपना परिवार चलाने वाले लोग होते हैं। उनके लिए करवा चौथ जैसे पर्व के कुछ दिन भी आमदनी का महत्वपूर्ण अवसर होते हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान नगर निगम की कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो उनकी आजीविका पर असर पड़ने की चिंता स्वाभाविक है। सवाल यह है कि शहर की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हुए क्या निगम प्रशासन छोटे व्यापारियों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रख रहा है?
आयुक्त कटनी में नहीं थीं, तो कार्रवाई का आदेश किसने दिया?
समाजसेवी इंद्र मिश्रा ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के माध्यम से नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब आयुक्त मैडम कटनी में मौजूद ही नहीं थीं, तो इस कार्रवाई के निर्देश किसने दिए? उनके सवाल ने निगम की प्रशासनिक जवाबदेही और कार्रवाई के निर्णय को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
हालांकि, कार्रवाई किस अधिकारी के आदेश पर की गई, संबंधित आदेश क्या था और मौके पर किन नियमों के आधार पर कदम उठाया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने आना जरूरी है। नगर निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और संबंधित अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए थे। आखिरकार, किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होना सुशासन का बुनियादी हिस्सा है।
अतिक्रमण हटाना जरूरी, लेकिन छोटे व्यापारियों की आजीविका का क्या?
शहर में यातायात सुचारु रखना, सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त करना और नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। लेकिन इन जिम्मेदारियों के निर्वहन का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि छोटे व्यापारियों की आजीविका से जुड़े सवाल पीछे छूट जाएं। यदि फुटकर दुकानें यातायात या आवागमन में बाधा बन रही थीं, तो नियमों के तहत कार्रवाई के साथ उन्हें दुकानें व्यवस्थित करने का अवसर देने अथवा उचित वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता था।
