
नगर निगम ने खुद गार्डन को किया था सील, फिर भी बड़े स्तर पर हुआ आयोजन; सीलिंग की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कटनी। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने जबलपुर रोड स्थित दिव्यांचल गार्डन को नियमों के उल्लंघन के चलते सील किया था, तो फिर उसी गार्डन में बड़े स्तर पर गरबा महोत्सव का आयोजन कैसे हो गया? यह सवाल अब नगर निगम की कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। आखिर जिस परिसर को निगम प्रशासन ने अपने स्तर पर सील किया था, वहां दोबारा गतिविधियां शुरू होने की अनुमति किसने दी और आयोजन किन परिस्थितियों में संपन्न हुआ?

गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व नगर निगम द्वारा नियमों के विपरीत संचालित हो रहे आधा दर्जन से अधिक मैरिज गार्डनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया गया था। इस कार्रवाई में जबलपुर रोड स्थित दिव्यांचल गार्डन भी शामिल था। कार्रवाई के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने गार्डन को सील किया था, लेकिन इसके बाद यहां बड़े स्तर पर गरबा महोत्सव का आयोजन होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में निगम की सीलिंग कार्रवाई की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
जब अधिकारियों ने सील किया, तो फिर आयोजन कैसे हुआ?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि यदि नगर निगम ने नियमानुसार गार्डन को सील किया था, तो उसके बाद वहां किसी बड़े आयोजन का होना कई सवाल खड़े करता है। क्या सील खोलने की विधिवत अनुमति दी गई थी? क्या गार्डन प्रबंधन ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं? यदि अनुमति दी गई थी, तो उसका आधार क्या था? और यदि अनुमति नहीं दी गई थी, तो सील किए गए परिसर में गरबा महोत्सव आयोजित होने की नौबत कैसे आई?
सीलिंग की कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।आखिर कार्रवाई के बाद परिसर की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या अधिकारियों को दोबारा शुरू हुई गतिविधियों की जानकारी थी?
कार्रवाई के बाद निगरानी कौन कर रहा था?
नगर निगम द्वारा किसी प्रतिष्ठान को सील करना केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है। ऐसे में यदि सील किए गए परिसर में दोबारा आयोजन होता है, तो उसकी परिस्थितियों की जांच आवश्यक हो जाती है। नगर निगम को सीलिंग संबंधी आदेश, परिसर की वर्तमान स्थिति, सील खोले जाने की अनुमति और गरबा आयोजन से संबंधित अनुमतियों की जांच कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
यदि जांच में बिना अनुमति संचालन या सीलिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यदि निगरानी में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी निर्धारित होनी चाहिए।
नगर निगम की कार्रवाई पर जनता को जवाब का इंतजार
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस गार्डन को नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने स्वयं सील किया था, वहां गरबा महोत्सव का आयोजन आखिर कैसे हुआ? क्या सीलिंग के बाद संचालन की अनुमति दी गई थी, या फिर निगम की कार्रवाई के बावजूद परिसर में गतिविधियां संचालित होती रहीं?
नगर निगम प्रशासन को इस मामले में स्पष्ट जवाब देते हुए वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए। सीलिंग की कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की भूमिका, निगरानी व्यवस्था और आयोजन की अनुमति की जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है या फिर सीलिंग की कार्रवाई के बाद हुए आयोजन का मामला भी अनुत्तरित रह जाता है।
