
बिना हेलमेट, बिना ग्लव्स और बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के कराया जा रहा था काम, करंट से झुलसा श्रमिक; नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल?
कटनी। नगर निगम कटनी द्वारा कराए जा रहे सीवर लाइन निर्माण कार्य में सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। ठेकेदार की कथित लापरवाही के चलते एक श्रमिक हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे नगर निगम के इस प्रोजेक्ट में आखिर श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
जानकारी के अनुसार काटाएघाट के पास नगर निगम के सीवर लाइन निर्माण कार्य के दौरान पिपरोध निवासी रवि कुशवाहा पाइप उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर रख रहा था। इसी दौरान पाइप ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया और तेज करंट की चपेट में आने से रवि गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। साथ काम कर रहे श्रमिकों ने तत्काल उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी श्रमिक राजू आदिवासी ने बताया कि कार्यस्थल पर श्रमिकों को किसी भी प्रकार की सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी। न हेलमेट, न इंसुलेटेड ग्लव्स, न सेफ्टी शूज और न ही हाईटेंशन लाइन के नीचे कार्य कराने के लिए कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ऐसे में मजदूरों से सीधे जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा था।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम के सीवर प्रोजेक्ट में ठेकेदार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कार्य करा रहे हैं। करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य के बावजूद श्रमिकों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते और हाईटेंशन लाइन के नीचे कार्य के दौरान आवश्यक सावधानियां बरती जातीं, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम केवल निर्माण कार्य की प्रगति पर ध्यान दे रहा है, जबकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी उसकी है। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाता, तो एक मजदूर की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
(यदि ठेकेदार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या नगर निगम का पक्ष उपलब्ध नहीं है, तो पत्रकारिता के संतुलन के लिए समाचार में यह उल्लेख करना उचित होगा कि “समाचार लिखे जाने तक ठेकेदार एवं नगर निगम का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।”)
