“विधायक जी लापता!” — यह जुमला इन दिनों मुड़वारा विधानसभा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सवाल सीधा और तीखा है—क्या मुड़वारा के तीन बार के विधायक संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल पूरे विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं, या विकास केवल कुछ चुनिंदा इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार भट्टा मोहल्ला, पाठक वार्ड, चौबे वार्ड और वंशरूप वार्ड जैसे घनी आबादी वाले पुराने क्षेत्रों में पिछले 10 से 15 वर्षों से विकास कार्यों की गंभीर अनदेखी की गई है। इन इलाकों में आज भी टूटी-फूटी सड़कें, बरसात में जलभराव, पेयजल संकट, सीवरेज की बदहाल व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—
“विधायक जी बड़े-बड़े ओवरब्रिज, कॉलेज और भवनों की उपलब्धियां गिनाते हैं, लेकिन हमारे वार्डों में तो एक दशक से कोई ठोस काम नहीं हुआ। क्या विकास सिर्फ खास इलाकों के लिए ही होता है?”
हालांकि विधायक संदीप जायसवाल द्वारा रेलवे ओवरब्रिज, जिला अस्पताल के उन्नयन, खेल मैदानों के पुनर्निर्माण और अनुपूरक बजट में करोड़ों रुपये के कार्यों की घोषणाएं की गई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—
क्या ये योजनाएं उन वार्डों तक पहुंचेंगी, जहां से सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आ रही हैं?
सोशल मीडिया पर बहस अब तेज हो चुकी है—
👉 “विकास लापता है या विधायक?”
जनता इंतजार कर रही है कि उपेक्षित इलाकों में भी विकास की दस्तक कब होगी, या फिर यह चर्चा केवल चुनावी वादों और घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएगी।
